उसे यह फ़िक्र है हरदम,
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- नया तर्जे-जफ़ा क्या है?
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- सितम की इंतहा क्या है?
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- चर्ख का क्यों गिला करें,
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- आओ मुकाबला करें।
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- ए-अहले-महफ़िल,
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- बुझा चाहता हूँ।
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- ख़यालों की बिजली,
- रहे रहे न रहे।
- है ना कुछ बात दोस्तों . मेरे ब्लॉग के इस प्रविस्ठी का नाम मैंने इसी कविता कि एक लाइन पे रखा है . इस सितम कि इन्तहा क्या है . वाकई इस एक लाइन से ही उस शहीद के जज्बे को सलाम करने का बारम्बार मन होता है . ये चुनौती थी पूरी अंग्रेजी सल्तनत को कि बता तेरे सितम कि इन्तहा क्या है . आ देखे तेरे बाजुओ में दम कितना है .